समस्त ब्लॉग/पत्रिका का संकलन यहाँ पढें-

पाठकों ने सतत अपनी टिप्पणियों में यह बात लिखी है कि आपके अनेक पत्रिका/ब्लॉग हैं, इसलिए आपका नया पाठ ढूँढने में कठिनाई होती है. उनकी परेशानी को दृष्टिगत रखते हुए इस लेखक द्वारा अपने समस्त ब्लॉग/पत्रिकाओं का एक निजी संग्रहक बनाया गया है हिंद केसरी पत्रिका. अत: नियमित पाठक चाहें तो इस ब्लॉग संग्रहक का पता नोट कर लें. यहाँ नए पाठ वाला ब्लॉग सबसे ऊपर दिखाई देगा. इसके अलावा समस्त ब्लॉग/पत्रिका यहाँ एक साथ दिखाई देंगी.
दीपक भारतदीप की हिंद केसरी पत्रिका
Showing posts with label लकड़ी. Show all posts
Showing posts with label लकड़ी. Show all posts

Thursday, August 21, 2008

आम इंसान से अलग सजाओ, भले ही बुत बनाओ-हास्य व्यंग्य कविता

कुर्सियां सजा दी और
भेज दिया संदेश लोगों में
बुतों की तरह उस पर बैठ जाओ
इस महफिल को सजाओ
अपना मूंह बंद रखना
हमारे इशारों को समझना
तब तक बैठे रहना जब तक
कहें नहीं खड़े हो जाओ
हम जो कहें उसकी सहमति में
बस अपना सिर हिलाओ’

इंसानों की भीड़ दौड़ पड़ी
उन कुर्सियों पर बैठने के लिये
सबका यही कहना था कि
‘आम इंसानों से अलग सजाओ
चाहे भले ही हमें एक बुत बनाओ’
..........................................................

ख्वाहिशों ने इंसानों को
हांड़मांस का बुत बना दिया
इससे तो पत्थर, लोहे और लकड़ी के बुत ही भले
आशाओं को जिंदा रखने के लिये
पुजने के लिये तो मिल जाते हैं
इंसान ने तो आशाओं का दीप ही बुझा दिया
......................................

दीपक भारतदीप की शब्दयोग पत्रिका पर लिख गया यह पाठ मौलिक एवं अप्रकाशित है। इसके कहीं अन्य प्रकाश की अनुमति नहीं है।
कवि एंव संपादक-दीपक भारतदीप

यह रचनाएँ जरूर पढ़ें

Related Posts with Thumbnails

हिंदी मित्र पत्रिका

यह ब्लाग/पत्रिका हिंदी मित्र पत्रिका अनेक ब्लाग का संकलक/संग्रहक है। जिन पाठकों को एक साथ अनेक विषयों पर पढ़ने की इच्छा है, वह यहां क्लिक करें। इसके अलावा जिन मित्रों को अपने ब्लाग यहां दिखाने हैं वह अपने ब्लाग यहां जोड़ सकते हैं। लेखक संपादक दीपक भारतदीप, ग्वालियर

यह रचनाएँ जरूर पढ़ें

Related Posts with Thumbnails

विशिष्ट पत्रिकाएँ