समस्त ब्लॉग/पत्रिका का संकलन यहाँ पढें-

पाठकों ने सतत अपनी टिप्पणियों में यह बात लिखी है कि आपके अनेक पत्रिका/ब्लॉग हैं, इसलिए आपका नया पाठ ढूँढने में कठिनाई होती है. उनकी परेशानी को दृष्टिगत रखते हुए इस लेखक द्वारा अपने समस्त ब्लॉग/पत्रिकाओं का एक निजी संग्रहक बनाया गया है हिंद केसरी पत्रिका. अत: नियमित पाठक चाहें तो इस ब्लॉग संग्रहक का पता नोट कर लें. यहाँ नए पाठ वाला ब्लॉग सबसे ऊपर दिखाई देगा. इसके अलावा समस्त ब्लॉग/पत्रिका यहाँ एक साथ दिखाई देंगी.
दीपक भारतदीप की हिंद केसरी पत्रिका
-------------------------


Sunday 22 March 2009

सूरज अगर डूबता नहीं-व्यंग्य क्षणिकाएँ

पानी से लहराती नदियों
उठते कहीं गिरते पहाड़ों
और हरियाली की चादर ओढ़े
चैन से खड़ा यह चमन था।
बन गया उजाड तब
जब आ गये वह गिद्ध
दिखते थे बहुत बड़े सिद्ध
नीयत थी जिनकी काली
पर जुबां पर पैगाम-ए-अमन था।
............................
इस जमीन पर औरत की
औरत तब तक ही सलमात थी
जब नहीं आये बेआबरू होने से
बचाने वाले पहरेदार
बातें करते थे जो रखवाली की
पर अदाओं में जिनके कयामत थी।
............................
हमने नहीं जाना तब तक
धोखा और गद्दारी क्या होती है
इश्क और यारी क्या होती है
जब तक दिल लगाया नहीं।
अब जाना कि वादे हमसे दोस्त करते हैं
इरादे कहीं और बसते हैं
वफा करते हैं हमेशा
मौका पड़ते ही गद्दारी से चूकते नहीं।
......................
सूरज अगर डूबता नहीं
उसकी कदर कौन करता।
यह अंधेरा ही है जो
उसके होने का अहसास दिलाता है
वरना उसकी इबादत कौन करता।

..................
दीपक भारतदीप की शब्दयोग पत्रिका पर लिख गया यह पाठ मौलिक एवं अप्रकाशित है। इसके कहीं अन्य प्रकाश की अनुमति नहीं है।
कवि एंव संपादक-दीपक भारतदीप

अन्य ब्लाग
1.दीपक भारतदीप की शब्द पत्रिका
2.अनंत शब्दयोग
3.दीपक भारतदीप की शब्दयोग-पत्रिका
4.दीपक भारतदीप की शब्दज्ञान पत्रिका
लेखक संपादक-दीपक भारतदीप

0 comments:

विशिष्ट पत्रिकाएँ