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Friday, March 14, 2008

नारद १ जनवरी १९७० में पहुंचा

नारद आज १ जनवरी १९७० में पहुंच गया है। अभी तक टीवी सीरियलों और फिल्मों में तमाम पात्रों को इतिहास की तारीखों में जाते देखते थे पर आज नारद को भी जाते देखा। उसके लोगो पर क्लिक करने के बात मैं बहुत देर तक इस इन्तजार में बैठा रहा कि शायद आज धीरे-धीरे खुल रहा है। बहुत देर तक माथा मच्ची की पर कुछ समझ में नहीं आया। जब वापस लौटने को हुए तो तारीख पर नजर गयी। गुरूवार १ जनवरी १९७० की तारीख पडी थी। यह तो कंप्यूटर का खेल है। अगर उसमें १ जनवरी १९७० तारीख है तो वह पोस्ट भी उसी दिन की दिखायेगा और उस तारीख में तो कंप्यूटर का अता-पता नहीं था। फोरम चलाना कोई आसान काम नहीं है और अगर वहाँ विशेषज्ञ ठीक कर रहे हों तो कोई बात नहीं । अगर नहीं तो सूचित हो जाएं। पुराने ब्लोगर हैं और नारद को भी देखते हैं आखिर उसने हमें वह मुकाम दिया जिसकी कल्पना नहीं कर सकते थे। इसलिए अपना कर्तव्य समझ कर यह सूचना देरहे हैं और उम्मीद करते हैं कि जल्दी सब ठीक हो जायेगा। कंप्यूटर में तो यह सब चलता है।

4 comments:

SUNIL DOGRA जालि‍म said...

सूचना तो ठीक है जनाब..लेकिन आपकी बात बुरी न लग जाये वैसे भी 'लोग' सातवें आसमान पर हैं

परमजीत बाली said...

दीपकजी ,अच्छा किया आप ने सूचित कर दिया।वैसे भी नारद के प्रति लगाव के कारण बैचेनी होने लगती है।आभार।

amit gupta said...

अगर उसमें १ जनवरी १९७० तारीख है तो वह पोस्ट भी उसी दिन की दिखायेगा और उस तारीख में तो कंप्यूटर का अता-पता नहीं था।

जनाब किसने कहा कि उस समय में कंप्यूटर नहीं होते थे? बिलकुल होते थे, इलेक्ट्रॉनिक कंप्यूटर 1950 के दशक से मौजूद हैं, चाँद की अमेरिकी यात्रा में उनके अंतरिक्ष यान में भी कंप्यूटरों का प्रयोग हुआ था!! ;)

फोरम चलाना कोई आसान काम नहीं है और अगर वहाँ विशेषज्ञ ठीक कर रहे हों तो कोई बात नहीं ।

बिलकुल आसान काम नहीं है जी, हमसे पूछिए हमें पता है कि नारद पर कितनी रातें काली की हैं!! :) नारद में पीछे कुछ तकनीकी पंगा हो गया था जिस कारण फीड प्रोसेस नहीं हो रही थी और इसलिए वह लिनक्स की शुरुआती तारीख 1 जनवरी 1970 दिखा रहा होगा। नज़र में आते ही इसको निपटा दिया गया और नारद अब पुनः टका-टक चल रहा है।

इस समस्या की ओर ध्यान आकर्षित करने के लिए आपको धन्यवाद। :)

amit gupta said...

सूचना तो ठीक है जनाब..लेकिन आपकी बात बुरी न लग जाये वैसे भी 'लोग' सातवें आसमान पर है

बुरी क्यों लगेगी सुनील जी, दीपक जी ने तकनीकी समस्या की ओर ध्यान ही तो आकर्षित करा है, हम लोग तो आभारी होते हैं कि यदि कोई समस्या हो और लोग-बाग़ उसकी ओर ध्यान आकर्षित करते हैं तो क्योंकि दीपक जी जैसे सजग लोगों के कारण ही समस्या का जल्दी पता लगता है तो उसका निवारण भी जल्दी हो जाता है। :)

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